अब साहित्य केवल पढ़ा ही नहीं, बल्कि उनकी आवाज़ में महसूस भी किया जा सकता है ,चंचल जी के शब्द सीधे आपके दिल तक ।
रामकुमार चतुर्वेदी 'चंचल' द्वारा
रामकुमार चतुर्वेदी 'चंचल' द्वारा
रामकुमार चतुर्वेदी 'चंचल' द्वारा
रामकुमार चतुर्वेदी 'चंचल' द्वारा
गीत में भरकर जलधि का ज्वार लाया हूँ, छन्द में तूफान की हुँकार लाया हूँ,
शारदा के कण्ठ को अनुभव नया होगा, गूँथ फूलों की जगह अंगार लाया हूँ!,